Wednesday, March 23, 2011

तुम्हे क्या पता ..

तुम्हे  क्या  पता ..

 
तुम तो मुझे शालीन समझती थी,
सोचती थी मैं किसी के पीछे न जाता था,
तुम्हे क्या पता तुम्हे देखने,
लैब की खिड़की पे छुप छुप के मैं रोज आता था,
मेरी सूरत को सीधा देख,
मुझे मासूम समझना तो तेरी मासूमियत थी,
तुम्हे क्या पता
 तिरछी नज़रों से मैं क्या क्या कर जाता था..

न सोचो की मुझे पता नहीं,
कि तू भी मुझे देखा करती थी,
जब भी  मैं तुम्हे देखने की कोशिश करता,
तब तेरी आँख मेरे से जो लडती थी,
तुझे आज भी लगता है,
  तेरा मेरा पसंदीदा रंग एक होना इत्तफाक है,
तुम्हे क्या पता,
 तेरी पसंद जानने के पहले मेरी पसंद कुछ और हुआ करती थी.

तुझसे बातें करना, तुझे  सुनना,
तुझसे सवाल पूछना तो मेरी आदत सी थी,
तुम्हारा लैब के बाद भी लैब नोट्स समझाना,
लगता था जैसे तुझे बहुत फुर्सत सी थी,
तुझे आज भी लगता है,
 मुझे पढाई और लैब में दिक्कत हुआ करती थी,
तुम्हे क्या पता वो वक़्त आता था,
 क्योंकि जाँ मेरी उस वक़्त की दुआ करती थी.

तेरे पैरों के पास जो कभी पेन का ढक्कन गिरता,
और फिर जो तू उठा के मुझे देती थी,
मेरे हाँथ उठाने से ढक्कन लेने तक की हर सांस,
मेरे दिल के जख्मों में दवा देती थी,
तुझे आज भी लगता है,
ढक्कन गिरना बस गलती हुआ करती थी,
तुम्हे क्या पता,
वो ढक्कन ढीली मेरे ही हांथों हुआ करती थी.

तुझे क्लास में एक दिन रोता देख,
मेरे आँखों में आंसू से लगा तुझे की फ़ाराख-दिल हूँ मैं,
तेरी हर ख़ुशी, हर बात पे हँसता देख,
तुझे लगा की हंसमुख हूँ मैं,
तुझे आज भी लगता है,
तेरे प्रति झुकाव दिखाना मेरी शरारत हुआ करती थी,
तुम्हे क्या पता,
हर आंसू, हर ख़ुशी के पीछे मेरी मुहब्बत हुआ करती थी .

10 comments:

  1. "तेरी पसंद जानने के पहले मेरी पसंद कुछ और हुआ करती थी."..nice line yaar!!..nice sentiments :) feels like one of my own :P :)

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  2. मस्त भाई, एक दम दिल को छू गयी, बहुत बढ़िया ऐसी ही २-४ और लिखिए

    अब कोई ब्लोगर नहीं लगायेगा गलत टैग !!!

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  3. kya bat h, Aman babu, kabhi pta bhi nhi chalne di yaar,...

    mai samajhta tha, ki aap to bas dildar ho,
    pta to aaj chala, aap to chhuparustam ka bazar ho,
    kitni iftafaak h, muje bhi aati h sararat,
    but kabhi mere sath bhi to kuch aisa chamatkar ho,...!!!!

    by-Om.

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  4. loved it... :) ... but dnt make us wait so much for ur next one

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  5. @all Dhanyawad :)
    @om..tumhari lines bhi achi lagi mujhe :)
    @saurabh..i will try for next post soon :)

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  6. तेरी पसंद जानने के पहले मेरी पसंद कुछ और हुआ करती थी
    lovely lines :)

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  7. really nice......aman bhaiya ye kavi ki kalpana hai ya..haqiqat kuch batayenge......

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