रविवार, 1 जनवरी 2012

सुना है खुदा तुम ही हो..

सुना है खुदा तुम ही हो.. 

तेरी बस्ती में आया हूँ
 चंद सांसें खरीदने
 सुना है हमनें,
 तुम जिंदगी हो..

हंसी भी उधार लेनी है हमें
सुना है
तुम ख़ुशी हो..

खाबों का क़त्ल हुआ है
जख्म मिटाने आया हूँ
सुना है हमनें,
दर्द मिटते हैं
जो तुम छूती हो..

नए खाब सजाने आया हूँ
सुना है
तुम परी हो..

नशा कहाँ है 
ख़राब के प्यालों में
सुना है हमनें
लोग धुत होते हैं
जो तुम देखती हो..

रुख करो अपना 
एक बार मेरी तरफ
गर थोड़ी मेहरबानी हो.. 

इस चकाचौंध दुनिया में
फरेब भरा है
तुझे देखने आया हूँ
सुना है हमनें
तुम सादगी हो..

जिंदगी में बोलते हैं सन्नाटे
तन्हाई मिटाने आया हूँ
सुना है
तुम महफ़िल हो..

कुछ रास्ते जानने आया हूँ
जिनमे जीते हैं पल जिंदगी के
सुना है हमनें 
तुम सब जानती हो..

कीमत तुम लगाओ इनकी
तेरे बाज़ार में 
सब कुछ लुटाने आया हूँ..

ए अजनबी 
 तेरी बस्ती में आया हूँ
जिंदगी खरीदने
सुना है 
खुदा तुम ही हो..

रविवार, 25 दिसंबर 2011

छोड़ दी हमनें वो राहें ..

छोड़ दी हमनें वो राहें ..

टुकड़े टुकड़े दिन बीते
रातें रोई मेरी तड़प कर
फैज की बात सोचे कौन मुहब्बत में
आँखों पे आंसू पर लब पे दुआ है..

नज़रें, अदाएं कातिल है तेरी
मरते देखा है कईयों को हमनें
तू पत्थर दिल है पर,
कभी दिखा नहीं  
की जिंदगी से तेरा क्या वास्ता है..

खाबों ने पाँव रखे तेरी दुनिया में
फिसले और टूट गए
हमने चुनने की कोशिश नहीं की
कहा अब इन खाबों में रखा क्या है..

जलती बुझती आँखों में
जो जिंदगी बीती है मेरी
देखने की कोशिश है अब
की इन बेचैनियों के पार क्या है..

गम ए दिल को समझाया हमें
मानता है वो अब, की तू बेवफा है..
खुश रह तू दूर मुझसे रहकर अकेला 
छोड़ दी हमनें वो राहें जहाँ तेरी दुनिया है..


शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

कुछ पंक्तियाँ..

कुछ पंक्तियाँ..

"ये गहने दुकानों की सेजों पर कितने खुबसूरत थे, 
तूने जो पहना, तेरी खूबसूरती के आगे फीके पड़ गए हैं.."

"पुछा मैंने ए जिंदगी इस मुहब्बत में रखा क्या है 
कहा जिंदगी ने, सोच तेरे मुस्कराने की वजह क्या है.."

"मन जो बातें तेरी करता है 
कहता हूँ मैं रुक जा तू
क्यूँ मुझको हर बार रुला देता है
क्यूँ खुद, खुद को भुला देता है.."


"जिंदगी तो बस तेरी आंखों में देखी है हमनें 
दूर न जा ए सनम की इन साँसों का क्या करूँगा मैं.."

"तेरे हुस्न की खबर तो उन वादियों को भी है,
जहाँ सूरज की किरणों, हवाओं का आना जाना नहीं..
वो भी चिंता करते हैं तेरी खुशियों की
जिनका अपना कोई ठिकाना नहीं..
तू आ गिरी है किसी और ही दुनिया में जानम
ये परीयों की दुनिया नहीं, ये तेरा जमाना नहीं.."


सोमवार, 5 दिसंबर 2011

कुछ पंक्तियाँ..

कुछ पंक्तियाँ..

"अपने हुस्न को जो तुमने हया के आँचल में ढक रखा है
तेरी खूबसूरती का असर यूँ कहीं ज्यादा गहरा है.."

"आज आइना मुझसे मेरा परिचय पूछ रहा था
कल तक देखता था जो मुझको, खुद में

आज वो ही पहचानने से इनकार करता है.."

"तूने आंसू बहाए हैं जितने मैंने कहाँ बहाए होंगे
पर तेरे हर आंसू पे मेरा लहू बहता था.."

"जनाब उनकी गोद में कुत्ते को देख देखकर
मोहल्ले के लड़के अपनी किस्मत पे रोते हैं.."



"यूँ तो बहौत दीवाने (लफंगे) तेरी गलियों से होकर गुजरे
तेरे दिल के दरवाजे तक पहुँचने वालों में तो हम है..
(यानि हम भी कभी लफंगे हुआ करते थे :) )"

"खुद की आँखों में धुल झोंक कर 
खुद को अलग दुनिया दिखाते रहे
जहन को हर वक़्त पता था
ये खेल महंगा पड़ेगा मुझे..
"अब तो मैंने खो दिया तुझे.." "

"तेरे लिए ये बस बहता खून का कतरा होगा
मेरे लिए तो ये तुझे भुलाने की कोशिश है

जो हर कतरे में आ बसा है.."


सोमवार, 14 नवंबर 2011

इंजीनियरों की कहानी..क्या आप इंजीनियर हैं???

इंजीनियरों की कहानी..क्या आप इंजीनियर हैं???
(Add lines in this poem, there is lot of scope :))


पूरा सेमेस्टर मस्ती में बिता लेते हैं लोग
ये तो टैलेंट है कि तब भी 8ठी बना लेते है लोग
एक्साम के दिन की पिछली रात
सब्जेक्ट के बारे में पता लगाते हैं
नोट्स रात को जुगाड़ के सोते हैं
दिन में कवर देख के ही काम चला लेते हैं लोग
पढ़ते तो वही २-४ घंटे हैं सेमेस्टर में
एक्जाम हॉल में बैठ कर ही दिमाग लगा लेते हैं लोग
प्रोफेसरों के कठिन सवालों का असर कहाँ पड़ता है
अगल बगल २-३ अच्छे दोस्त बिठा लेते हैं लोग
वही जो ५-१० मिनट का समय मिलता है चीटिंग को
उसी समय में हुहा टाइप मचा लेते हैं लोग
बाथरूम के बहाने जाते हैं बाहर
और वहीँ जुगाड़ लगा लेते हैं लोग..

आलराउंडर बन्ने की खाहिश रखते हैं
१ दिन बास्केट बल, १ दिन टेनिस, १ दिन बैडमिन्टन 
सब खेल खेल जाते हैं 
अंत में लैपटॉप में डाउनलोड करवा लेते हैं लोग
खुद को समझ में जो न आई हो बात
उसे भी बहार वालों को समझा लेते हैं लोग
लड़की तो मिलती नहीं सबको
दूसरों की ही देख के मुस्कुरा लेते हैं लोग
रातों रातों में भटकते हैं इधर उधर
breakfast तो सपनों में खा लेते हैं लोग
क्लासेज तो २-४ ही कर पाते हैं 
फिर भी अटेंडेंस पूरा करवा लेते है लोग

किसी के बर्थडे पर जमकर मारते है
खुद के बर्थडे पर ख़ुशी खुशी मार खा लेते है लोग
जाते हैं खाना खाने संग साथियों के 
और मजाक में टुल हो जाते हैं
किसी रात दोस्तों के कंधे पे आते हैं
किसी रात उन्ही के कन्धों पर पनाह लेते हैं लोग
हँसते हैं, रोते हैं, गाते हैं, घूमते हैं संग
दोस्तों के सहारे कॉलेज लाइफ बिता लेते हैं लोग.. 

दोस्तों को उधर दिया तो माँगा करते हैं 
और खुद लिया तो कहाँ देते हैं लोग 

अंतिम के कुछ क्षणों में असाइनमेंट  की याद आती है
और उन्ही पलों में प्रोजेक्ट बना लेते हैं लोग
लैब रिपोर्ट तो मिल ही जाती है
viva में तो बस मजा लेते हैं लोग
क्लास में सोते हुए पकडे गए तो
रात में पढने का बहाना बनाते हैं  
क्लास नहीं आये कभी तो
मेडिकल में दोस्त से साइन करवा लेते हैं लोग ..

प्लेसमेंट की बात ही क्या करें
हँसते हँसते वो भी समय बिता लेते हैं लोग
जवाब दिया interview में तो ठीक
वरना अगले में तुक्का भिड़ा लेते है लोग
प्लेस नहीं हुए तो अपनी कंपनी बनाते हैं
हो गए तो उसी को ही डुबा लेते हैं लोग..

प्रोफ़ेसर सोचते हैं बंदा पास कैसे होगा और
देखते ही देखते साल का साल बिता लेते हैं लोग
ऐसे कर्मों को अंजाम देने के बाद ही
जाकर कहीं इंजीनियर कहलाते हैं लोग..

(Add lines in this poem, there is lot of scope :))

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

न जाने क्यूँ..

न जाने क्यूँ..

जो खफा रहूँ तुझसे,
कोशिश करूँ कोसने की 
पर मन से हर वक़्त
तेरे लिए दुआ जा निकलती  है..

बस एक झलक तेरी यादों की
लेने आँखें बंद करता हूँ
यादें सपनों के संग
न जाने कहाँ कहाँ जा निकलती है..

बातें तो तेरी करने से
खुद को रोकता हूँ पर
लब को बहकाए मन और
तेरी ही बातें आ निकलती है..

तेरे जाने के पल याद आते है कभी
तो खुद को संभालता हूँ
पर हर बार दिल से हारता हूँ,
हर बार आह आ निकलती है..

छुपा रखा हूँ गम को 
की किसी को खबर न लगे 
न जाने फिर ये बात
कैसे बड़ी दूर जा निकलती है..

सोमवार, 7 नवंबर 2011

तेरे जाने के बाद ..

तेरे जाने के बाद ..

हर दिन चिट्टी लिखता हूँ नयी, पर 
डाकिये के गली से भी गुजरता नहीं मैं
जो बोला तूने की चिट्ठी की राह न देखना मेरे जाने के बाद 

मुस्कान रखा हूँ चेहरे पर दर्द को ढंककर
जो कहा था तुमने हँसते रहना मेरे जाने के बाद 

आखें सूखी रखी हैं मैंने, पीड़ा सहकर भी
जो वादा किया था की रोयेंगे नहीं तेरे जाने के बाद 

भूलने की हर कोशिश कर रहा हूँ मैं 
पर भूलूं कैसे तुझे ये तो बता जाती 
बस कहकर गयी तू भूल जाना मुझे मेरे जाने के बाद

कहा था तुने राह नहीं देखना मेरी
मैंने राहों से कभी पूछा भी नहीं तेरे बारे में
पर एक बार आओ न जाना 
की जिंदगी हर पल सताती है तेरे जाने के बाद..